शुभ रात्रि शायरी – जैसे कुछ पाने के लिए

“जैसे कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है; मुस्कुराने के लिए भी रोना पड़ता है; यूं ही नहीं आते ख्वाब हसीं रातों को; देखने के लिए ख्वाब सोना भी पड़ता है।
शुभ रात्रि!”

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