शुभ रात्रि शायरी – दिल के सागर मे लहरें

“दिल के सागर मे लहरें उठाया ना करो; ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो; बहुत चोट लगती है मेरे दिल को; तुम ख़्वाबों में आ कर यूँ तडपाया ना करो।
शुभ रात्रि!”

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