शुभ रात्रि शायरी – दूर आसमान में चाँद शर्माया

“दूर आसमान में चाँद शर्माया है; फ़िज़ाओं में भी चाँदनी का रंग छाया है; खामोश न रहो अब तो मुस्कुरा दो; आपकी मुस्कान देखने ये रात का समय आया है।
शुभ रात्रि!”

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