शुभ रात्रि शायरी – बड़े अरमानो से इसे बनवाया

“बड़े अरमानो से इसे बनवाया है; रौशनी से इसे सजाया है; ज़रा बाहर आ कर तो देखो; खुद चाँद तुम्हें शुभ रात्रि कहने आया है।
शुभ रात्रि!”

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