शुभ रात्रि शायरी – सूरज ने झपकी पलक और

“सूरज ने झपकी पलक और ढल गयी शाम; रात ने है आँचल बिखेरा मिलकर तारों के साथ; देख कर रात का यह नज़ारा कहने को शुभ रात्रि हम भी आ गए हैं साथ।
शुभ रात्रि!”

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