शुभ रात्रि शायरी – हमें नहीं पता कौन सी

“हमें नहीं पता कौन सी आखिरी हो; ना जाने कौन सी मुलाक़ात आखिरी हो; इसलिए सबको याद करके सोते हैं हम; क्योंकि पता नहीं ज़िंदगी की कौन सी रात आखिरी हो।
शुभ रात्रि!”

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