Betiya Shayari – ओस की बुँद सी होती

ओस की बुँद सी होती है बेटीयाँ..
सपर्श खुरदरा हो तो रोती है बेटीयाँ..

रोशन करेगा बेटा तो एक कुल को..
दो दो कुलो की लाज होती है बेटीयाँ..

कोई नही है एक दुसरे से कम..
हीरा अगर है बेटा ….
….. तो सुचा मोती हैं बेटीयाँ…

काँटो की राह पर ये खुद ही चलती हैं..
औरो के लिए फुल होती है बेटीयाँ…

विधी का विधान है.. यही दुनीयाँ की रसम है..
मुठी भर नीर सी होती है बेटीयाँ…

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