Category: Benaqab Shayari

Benaqab Shayari – बाम-ए-मीना से माहताब उतरे दस्त-ए-साक़ी में

बाम-ए-मीना से माहताब उतरे
दस्त-ए-साक़ी में आफ़ताब आये

हर रग-ए-ख़ूँ में फिर चराग़ाँ हो
सामने फिर वो बेनक़ाब आये