Category: Dhokha Shayari

Dhokha Shayari – यूँ तो मैं दुश्मनों के

यूँ तो मैं दुश्मनों के काफिलों से भी
सर उठा के गुजर जाता हूँ…
बस, खौफ तो अपनों की गलियों से गुजरने में लगता है,
कि कोई धोखा ना दे दे |।।