Category: Dushman Shayari

नई हिंदी शायरी – यूँ तो मैं दुश्मनों के काफिलों

यूँ तो मैं दुश्मनों के काफिलों से भी सर उठा के गुजर जाता हूँ…
बस, खौफ तो अपनों की गलियों से गुजरने में लगता है कि कोई धोखा ना दे दे।