Category: Dushman Shayari

Dushman Shayari – अँधेरे अब नहीं डसते उजाले

अँधेरे अब नहीं डसते, उजाले वार करते हैं;
जो दुश्मन भी नहीं करते, वो मेरे अपने करते हैं..


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नई हिंदी शायरी – यूँ तो मैं दुश्मनों के काफिलों

यूँ तो मैं दुश्मनों के काफिलों से भी सर उठा के गुजर जाता हूँ…
बस, खौफ तो अपनों की गलियों से गुजरने में लगता है कि कोई धोखा ना दे दे।