Category: Kashmakash Shayari

Kashmakash Shayari – कितने मसरूफ़ हैं हम जिंदगी

कितने मसरूफ़ हैं हम जिंदगी की कशमकश में
इबादत भी जल्दी में करते हैं फिर से गुनाह करने के लिए


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