Dooriyan Shayari – ज़रा “क़रीब” आओ.. तो शायद

ज़रा “क़रीब” आओ.. तो शायद हमे समझ पाओ..
यह “दूरियां” तो सिर्फ गलत फेहमियां बढाती हैं.. !

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