Ehsaan Shayari – खुदगर्ज़ की बस्ती में एहसान

खुदगर्ज़ की बस्ती में एहसान भी एक गुनाह हैं,
जिसे तैरना सिखाओ वही डुबाने को तैयार रहता हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading…