Hichki Shayari – कहीं बैठी वो मेरा ज़िक्र

कहीं बैठी वो मेरा ज़िक्र कर, मुस्कुरा रही होगी…
ये हिचकी शाम से, यूँ ही तो नहीं आ रही होगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

loading…