Inspirational Shayari – रोज़ रोज़ गिर कर मुकम्मल खड़ा

रोज़ रोज़ गिर कर मुकम्मल खड़ा हूँ,
ज़िन्दगी देख, मैं तुझसे कितना बड़ा हूँ.

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