Kareeb Shayari – सिखा न सकी … जो उम्र

सिखा न सकी ,…
जो उम्र भर तमाम किताबें मुझे ,…

करीब से कुछ चेहरे पढ़े ,…
और न जाने कितने सबक सीख लिए ,…

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