Kasoor Shayari – बेक़सूर ज़िंदगी इल्ज़ामों से घिरी

बेक़सूर ज़िंदगी इल्ज़ामों से घिरी रही
कसूरवार हँसता रहा मुझ पर ताउम्र …..

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