Majboor Shayari – मेरी तमन्ना न थी तेरे

मेरी तमन्ना न थी तेरे बगैर रहने की ….
लेकिन
मज़बूर को ,मज़बूर की ,मजबूरिया.. मज़बूर कर देती है ..!!!!

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