Prerak Shayari – डर मुझे भी लगा फांसला

डर मुझे भी लगा फांसला देख कर!
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर!
खुद ब खुद मेरे नज़दीक आती गई!
मेरी मंज़िल मेरा हौंसला देख कर।

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