Shaam Shayari – उफ़्फ़! कितनी बार कहा हैं

उफ़्फ़! कितनी बार कहा हैं, शाम ढले याद आया ना करो…
शाम की चाय ज़्यादा मिट्ठी हो जाती हैं…!!

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