Sukoon Shayari in Hindi – सुकून शायरी इन हिंदी

बचपन जो गया, सुकून साथ ले गया,
चुनौतियों और जिम्मेदारियों का बोझ दे गया।

मिल जाता है सुकून उनकी तस्वीर देख कर,
कुछ शख्स हमारी जिंदगी में ऐसे भी होते हैं।

चलो थोड़ा सुकून की और चला जाए,
जो दिल दुखाते हैं उनसे दूर ही रहा जाए।

सुकून की तलाश में हम दिल बेचने निकले थे,
खरीदार दर्द दे गया और दिल भी दे गया।

किसी और से दिल लगाते तो हम भी सुकून पाते,
उसकी चाहत में यूँ सरेआम जलालत ना उठाते।

इश्क़ भी हो सुकून भी मिले,
खुदा ने ये सहूलियत बनायी ही नहीं।

सालो साल बातचीत से उतना सुकून नही मिलता,
जितना सिर्फ एक बार गले लग कर मिलता है।

जलजला-सा जो था कल,
वो आज सुकून-सा है,
मोहोब्बत ना छोड़ी जायेगी अब हमसे,
उसका तो अब जूनून-सा है।

खुद औरों को दर्द दिये फिरतें है,
और कहतें है सुकून भरी बाँहों की तलाश है हमे।

सांसो में समाओ तो खुशबु है हम,
और दिल में उतरो तो सुकून है हम।

आयोडेक्स सा है, प्यार तेरा,
कभी जलन देता है, तो कभी सुकून देता है।

जिन अँधेरी रातों में चीज़ें तक नहीं मिलती,
आज वही मुझे सुकून मिल रहा है।

तेरे इश्क ने दिया सुकून इतना,
कि तेरे बाद कोई अच्छा न लगे,
तुझे करने है बेवफाई तो इस अदा से कर
कि तेरे बाद कोई बेवफा न लगे।

दूसरों को हंसी देकर मैं भी मुस्कुराता हूँ,
दूसरों के सुकून से मैं भी सुकून पाता हूँ।

ना तुम मिले ना सुकून मिला,
तेरे बाद ना फिर प्यार का फूल खिला।

ना शायरी में मिलेगा, ना नग्मों में मिलेगा,
ये सुकून बस माँ के क़दमों में मिलेगा।

तू मुझसे दूर है और पास भी,
तू लबों की हंसी है और आंसू भी,
तू दिल का सुकून है और बेचैनी भी,
तु मेरी अमानत है और एक सपना भी।

चेहरे पर सुकून तो बस दिखाने भर का हैं,
वरना बेचैन तो दिल जमाने भर का है।

अब बड़े हो गए तो ये जान चुके है की,
इंसान या तो सुकून में रह सकता है या बड़े घर में।

हमसे मत पूछना ख़्वाबों की क़ीमत,
बहुत ख़्वाबों को पाला है हमने भी सुकून बेच कर।

वो ना आए उनकी याद वफा कर गई,
उनसे मिलने की चाह सुकून तभा कर गई,
आहट दरवाजे की हुई तो उठकर देखा,
मजाक हमसे वफा कर गई।

ज़रा सुकून भी सहरा के प्यार ने न दिया,
मुसाफ़िरों को हवा ने पुकारने न दिया।

जहाँ भी ज़िक्र हुआ सुकून का,
वहीँ तेरी बाहोँ की तलब लग जाती हैं।

थोड़ा सुकून भी ढुँढिए जनाब,
ये जरूरते तो कभी खत्म न होगी।

एक सुकून की तलाश में,
जाने कितनी बेचैनियाँ पाल लीं,
और लोग कहते हैं हम बड़े हो गए,
हमने जिंदगी संभाल ली।

जब ज़िंदगी सुकून से महरूम हो गई,
उन की निगाह और भी मासूम हो गई।

जिद में आकर उनसे ताल्लुक तोड़ लिया हमने,
अब सुकून उनको नहीं और बेकरार हम भी हैं।

अपनी हार पर कितना सुकून था मुझे,
जब उसने गले लगाया जीतने के बाद।

मेरी हर खता पर नाराज़ न होना,
अपनी प्यारी सी मुस्कान कभी न खोना,
सुकून मिलता है देखकर आपकी मुस्कराहट को,
मुझे मौत भी आये तो भी मत रोना।

जागना भी कबूल हैं तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ।

सुकून की एक रात भी शायद नहीं ज़िंदगी में,
ख्वाहिशों को सुलाओ तो यादें जाग जाती हैं।

मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती, सिर्फ बढ़ती है,
या तो सुकून बनकर या दर्द बनकर।

खुशबू बनकर तेरी साँसों में समा जायेंगे,
सुकून बनकर तेरे दिल में उतर जायेंगे,
महसूस करने की कोशिश तो कीजिये,
दूर रहते हुए भी पास नज़र आएँगे.

वो हिचकिया एक अजीब सुकून दे जाती है,
जो तेरा नाम लेने से रुक जाती है।

जहां न दिल को सुकून है न है क़रार मुझे,
ये किस मक़ाम पे ले आई याद-ए-यार मुझे।

तुझे पाया, तो दिल ने सुकून पाया,
अर्से बाद फिर कोई खुशियाँ लाया।

साहिल के सुकून से किसे इन्कार है लेकिन,
तूफान से लड़ने में मज़ा ही कुछ और है।

काश एक सिरहाना ऐसा भी हो,
जहाँ मेरे गम सर रख कर सुकून से सो सके,
काश एक कमरा ऐसा भी हो,
जहाँ मेरी आँखे चीख-चीख कर रो सके।

कमाता चला जा रहा है पर वक्त नहीं है,
क्या खुशी ढूंढ रहा है जब सुकून नहीं है।

एक महबूब लापरवाह सा, एक मोहब्बत बेपनाह सी,
दोनों काफी हैं सुकून बर्बाद करने को।

बेचैनी भी जहाँ सुकून देने लगती है,
आ देख, उस दौर से गुजर रहा हूँ मैं।

मेरे हर एक नज़्म पर हमेशा,
तेरा ही सुरुर छाया होता है,
कैसे बात ना करू तुझ से,
आखिर ये सुकून का नशा है।

सुकून दिल को सदा जिस के नाम से आया,
वो आया भी तो किसी और काम से आया।

थोड़ा सुकून भी जरूरी है ज़िन्दगी मे,
यह जरूरते तो कभी ख़तम नहीं होती।

चकाचौंध के पीछे भागोगे तो सुकून कहाँ पाओगे,
दुनिया भर की दौलत से भी ख़ुशी खरीद ना पाओगे।

यूँ बेवफाई कर तुम भी सुकून से ना रहे पाओगे,
इस जालिम दुनिया में देखना,
तुम भी किसी और की बेवफाई का शिकार हो जाओगे।

सुकून की बात मत कर ऐ दोस्त,
बचपन वाला इतवार जाने क्यूँ अब नहीं आता।

सपनों के चक्कर में नींद बेच दी,
ऐशो-आराम खरीदने के लिए सुकून बेच दिया।

कभी ऐसा भी होता है कि सुकून के लिए,
किसी दवा कि नहीं किसी के लफ्जों की जरूरत होती है।

तेरी चाहतों को देख जुनून आता है,
तेरे चेहरे को देख सुकून आता है,
जी चाहता है तुझे यूँही उम्र भर ताड़ता रहूं,
मगर तेरे भाई इन नज़रों के बीच क्यूँ आता है।

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