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Hausla Shayari – ये राहें ले ही जाएंगी

ये राहें ले ही जाएंगी मंज़िल तक होंसला रख,
कभी सुना है कि अंधेरो ने सवेरा होने ना दिया।


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Hausla Shayari – जब टूटने लगे

जब टूटने लगे हौसले तो बस ये याद रखना,
बिना मेहनत के हासिल तख्तो ताज नहीं होते,
ढूँढ़ ही लेते है अंधेरों में मंजिल अपनी,
जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते…..!

Hausla Shayari – रख हौसला वो मंज़र भी

रख हौसला, वो मंज़र भी आएगा
प्यासे के पास चल के, समंदर भी आयेंगा

थक कर ना बैठ, ए मंजिल के मुसाफिर
मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आएगा

Hausla Shayari – कभी महक की तरह हम

कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं

ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी
की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं