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Khushboo Shayari – खुशबू बनकर गुलों से उड़ा

खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते हैं,
धुआं बनकर पर्वतों से उड़ा करते हैं,
ये कैंचियाँ खाक हमें उड़ने से रोकेगी,
हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं.

Khushboo Shayari – तन्हाईयां जाने लगी जिंदगी मुस्कुराने

तन्हाईयां जाने लगी जिंदगी मुस्कुराने लगी,
ना दिन का पता है ना रात का पता.
आप की दोस्ती की खुशबू हमे महकाने लगी,
एक पल तो करीब आ जाओ धड़कन भी आवाज़ लगाने लगी..

Khushboo Shayari – गुलाब की खुशबू भी फीकी

गुलाब की खुशबू भी फीकी लगती है,
कौन सी खूशबू मुझमें बसा गई हो तुम,

जिंदगी है क्या तेरी चाहत के सिवा,
ये कैसा ख्वाब आंखों में दिखा गई हो तुम.