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Ulfat Shayari – उल्फत का अक्सर यही दस्तूर

उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है!
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है!
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर!
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!

Ulfat Shayari – चुपके से धड़कन में उतर

चुपके से धड़कन में उतर जायेंगे,
राहें उल्फत में हद से गुजर जायेंगे,
आप जो हमें इतना चाहेंगे ऐ ग़ालिब
हम तो आपकी साँसों में पिघल जायेंगे.